Gyaan Vridhi - Technical Knowledge in Hindi

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कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?

कंप्यूटर की परिभाषा क्या है? यह सवाल अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कंप्यूटर के बिना हमारी जिंदगी अधूरी है। तो आइए इस लेख के द्वारा हम कंप्यूटर की परिभाषा को समझने की कोशिश करते हैं।

computer ki paribhasha kya hai

कंप्यूटर की परिभाषा क्या है?(कंप्यूटर की परिभाषा हिंदी में )

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन या डिवाइस होता है जिसे हिंदी में गणक या फिर संगणक भी कहा जाता है।इसे गणक या संगणक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी उत्पत्ति इंग्लिश के compute शब्द से हुई है जिसका अर्थ गणना करना होता है।कंप्यूटर का इस्तमाल लोग हर छेत्र में अपने काम को आसान बनाने के लिए करते हैं। कंप्यूटर को कार्य करवाने के लिए उपयोगकर्ता द्वारा इनपुट दिया जाता है। एक बार इनपुट प्राप्त करने के बाद फिर कंप्यूटर उस इनपुट को प्रोसेस करता है और उपयोगकर्ता के निर्देश अनुसार रिजल्ट या फिर आउटपुट प्रदान करता है।

अब आप शायद सोच रहे होंगे कि यह इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट क्या होता है ?तो चलिए समझते हैं इन्हें सरल भाषा में :-

इनपुट(Input):- निर्देश जो कि उपयोगकर्ता द्वारा कंप्यूटर को दिए जाते हैं।

प्रोसेस(Process):- कंप्यूटर द्वारा हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की मदद से दिए गए निर्देश पर की जाने वाली क्रिया को प्रोसेसिंग कहते हैं।

आउटपुट (Output):- कंप्यूटर द्वारा दिए गए परिणाम को आउटपुट कहा जाता है।

वैसे तो कंप्यूटर के बहुत सारे प्रकार होते हैं लेकिन इस लेख में हमने कंप्यूटर को उसकी कार्य प्रणाली के अनुसार विभाजित कर दिया है। कार्य प्रणाली के अनुसार कंप्यूटर के तीन प्रकार होते हैं:-

१) Analog कंप्यूटर:- ऐसे कंप्यूटर जो भौतिक मात्राओं को नापते हैं उन्हें एनालॉग कंप्यूटर कहा जाता है।Analog कंप्यूटर भौतिक मात्राएँ जैसे- दाब (Pressure), तापमान (Temperature), लम्बाई (Length), ऊचाई (Height) आदि को मापकर उनके परिमाप अंको में व्यक्त करते है। इनका उपयोग science और विज्ञान के छेत्रों में ज्यादा किया जाता है क्योंकि इन छेत्रों में भौतिक मात्राओं का अधिक उपयोग होता है।

२) Digital कंप्यूटर:- ऐसे कंप्यूटर जो अंकों की गरणा करते हैं उन्हें digital कंप्यूटर कहा जाता है। इसमें सभी प्रकार के इनपुट व आउटपुट अंको के रूप में होता है जो Machine या Binary Code (0, 1) कहलाता है।Digital कंप्यूटर सबसे सर्वाधिक प्रयोग में आने वाले कम्प्यूटर्स होते हैं। इनका उपयोग ऑफिस, कॉलेज, स्कूल, दुकान, रेलवे, बैंक, आदि जैसे स्थानों पर किया जाता है। डेस्कटॉप, लैपटॉप, मोबाइल, डिजिटल घड़ी आदि डिजिटल कम्प्यूटर्स के उदहारण हैं।

३) Hybrid कंप्यूटर:- ऐसे कंप्यूटर जिनमें एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर दोनों की ही विषेशताएँ हों उन्हें हाइब्रिड कंप्यूटर कहा जाता है। हाइब्रिड कंप्यूटर अंको की गणना करने के साथ-साथ मात्राओं को मापने में भी सक्षम होते हैं। उदाहरण के तौर पर जब आप किसी अस्पताल में जाते हो तो वहां पर लगा हुआ कंप्यूटर हाइब्रिड कंप्यूटर होता है जिसके द्वारा किसी भी मरीज के तापमान, ब्लड प्रेशर, धड़कन आदि को मापा जा सकता है और अंकों में व्यक्त किया जा सकता है। पेट्रोल पंप में लगी हुई मशीन भी हाइब्रिड कंप्यूटर होती है जो पेट्रोल की मात्रा मापने के साथ साथ मूल्य की गणना भी अंकों में व्यक्त करती है।

हर कंप्यूटर दो बुनियादी घटकों से बने होते हैं :-

Hardware:- कंप्यूटर हार्डवेयर कंप्यूटर सिस्टम के भौतिक भागों का एक संग्रह होता है। कंप्यूटर में हर वो चीज जिसे आप छू सकते हैं और महसूस कर सकते हैं उसे हम हार्डवेयर कहते हैं। उदाहरण के तौर पर हार्ड ड्राइव, माउस, सीपीयू, कीबोर्ड, स्क्रीन आदि।

Software:- भौतिक अस्तित्व ना होने के कारण आप कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को ना तो देख सकते हैं और ना ही छू सकते हैं। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डेटा या फिर कंप्यूटर निर्देशों का एक संग्रह होता है जो कंप्यूटर को काम करने का तरीका बताता है। सॉफ्टवेयर के अंतर्गत ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन आते हैं। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को काम करने के लिए एक दूसरे की आवश्यकता होती है और दोनों ही एक दूसरे पर निर्भर होते हैं।

कंप्यूटर का आविष्कार:-

Charles Babbage

कंप्यूटर का आविष्कार एक ब्रिटिश गणितज्ञ (Charles Babbage) द्वारा 19सवी सदी में किया गया था। Charles Babbage को कंप्यूटर का जनक (Father of Computer) भी कहा जाता है।

कंप्यूटर का full फॉर्म:-

C-Commonly, O-Operated, M-Machine, P-Particularly, U-Used For, T-Technical, E-Educational, R-Research.


कंप्यूटर की परिभाषा इंग्लिश में:-

The word Computer is derived from the word "Compute" in the Eglish language, which means "to calculate", & because of its meaning, it is also called a calculator.

Computer is an electronic device which works according to the stored program in its memory. Input is given to the computer to work, then the computer provides us with the output according to the programmed process. The computer mainly performs three functions:-

1) Input Data (giving data to computer)
2) Processing (Processing data)
3) OutPut (showing processed data)


कंप्यूटर की विशेषताएं:-

एक कंप्यूटर की ऐसी क्या खास विशेषताएं जो उसे दूसरों से अलग बनाती है। चलिए इसके बारे में हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं:-

१) Speed:-

हम सभी जानते हैं कि कंप्यूटर कोई भी काम बहुत ही तेजी से करते हैं। कोई भी कैलकुलेशन जिसे करने के लिए हमें घंटों लग सकते हैं कंप्यूटर महज कुछ सेकंड में ही उसे पूरा कर देते हैं।

आपको यह जानकर शायद आश्चर्य होगा कि एक कंप्यूटर महज 1 सेकंड में करीब 1 मिलियन निर्देशों को प्रोसेस कर सकता है।

२) Accuracy:-

कंप्यूटर तेज होने के साथ-साथ बिल्कुल सटीक भी होते हैं। अगर कभी कोई error कंप्यूटर में आता भी है तो वो अक्सर मानवीय गलतियों की वजह से आता है जिनमें गलत डाटा, खराब डिजाइन और गलत निर्देश जैसे कारक शामिल हैं।

३) Diligence:-

मनुष्यों के विपरीत,कंप्यूटर आलस्य और थकावट जैसे मानवीय लक्षणों से कभी पीड़ित नहीं होते हैं। इसीलिए मनुष्यों की तुलना में कंप्यूटर अपना काम बहुत ही लगन और सटीक तरीके से करते हैं।

४) Versatility:-

कंप्यूटर एक बहुमुखी मशीन होती है जो किसी भी कार्य को करने में सक्षम होती है,इसीलिए कंप्यूटर की उपस्थिति लगभग हर क्षेत्र में देखी जा सकती है जैसे कि रेलवे, बैंक, होटल, मौसम का पूर्वानुमान और कई अन्य।

५) Storage Capacity:-

आज के आधुनिक कंप्यूटर में डाटा को बड़ी मात्रा में स्टोर किया जा सकता है। कंप्यूटर में स्टोर किए गए डाटा को कंप्यूटर कभी नहीं भूलता है और जब भी इस डाटा की जरूरत पड़े तो उसे तुरंत हासिल भी किया जा सकता है। आप अपने डाटा को कंप्यूटर में काफी लंबे समय तक safely स्टोर करके रख सकते हैं।

६) IQ का आभाव:-

कंप्यूटर में मनुष्य में पाई जाने वाली IQ लेवल क्षमता नहीं होती है। कंप्यूटर बिना निर्देशों के कोई भी काम अपनी मर्जी से नहीं कर सकता।

७) NO FEELING:-

कंप्यूटर की कोई भी feelings नहीं होती है। इसमें मनुष्य के विपरीत कोई भी भावना, अनुभव, या knowledge नहीं होता है।

निष्कर्ष:-

उम्मीद करते हैं कि इस लेख में हमने कंप्यूटर को सही तरीके से परिभाषित किया और आपको कंप्यूटर की परिभाषा क्या है? समझ में आ गई होगी। अगर आपको लगे इस लेख में कोई भी सुधार की जरूरत है तो आप हमें बेझिझक सूचित कर सकते हैं और हां अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ facebook ,twitter आदि जैसे सोशल networks पर शेयर करना बिल्कुल भी ना भूलें।

On-Page SEO क्या होता है? What is On-Page SEO?

क्या आप अपनी वेबसाइट या फिर पोस्ट को सर्च इंजिन्स पर रैंक करवाना चाहते हैं ? क्या आप अपनी वेबसाइट या पोस्ट के ट्रैफिक को बढ़ाना चाहते हैं ? अगर आपका जवाब हाँ में है तो फिर आपको on -page SEO के बारे में जरूर जानना चाहिए।आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम यह सीखेंगें कि On-Page SEO क्या होता है? What is On-Page SEO? और इसे कैसे किया जाता है।


On-Page SEO क्या होता है? What is On-Page SEO?

On-Page SEO क्या होता है?(On-Page SEO in Hindi ) 

किसी भी वेब पेज को optimize करना ही On-Page SEO कहलाता है। वेब पेज को optimize करने का मतलब होता है कि उस वेब पेज में सही कॉन्टेंट ,कीवर्ड्स ,टाइटल ,हैडिंग ,images ,यूआरएल और meta description डालना जिससे कि वो particular वेब पेज search engines पर रैंक कर सके और उसपर अधिक से अधिक ट्रैफिक यानी कि visitors आ सके। On-Page SEO द्वारा आप search engines को यह बता सकते हैं कि आपका वेब पेज किस टॉपिक पर है और उसे किन-किन कीवर्ड्स पर रैंक करवाना है?

On-Page SEO करना क्यों जरुरी होता है?

आपकी वेबसाइट की हर एक पोस्ट के लिए आपको On-Page SEO करना जरुरी होता है। यह गूगल या फिर किसी भी सर्च इंजन को यह बताता है कि आपकी पोस्ट किस टॉपिक पर है और कौन-कौन से कीवर्ड्स पर आपकी पोस्ट को रैंक करवाना है। दोस्तों On-Page SEO बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसमें बहुत ही कम समय लगता है और यह हर पोस्ट के लिए सिर्फ एक बार ही करना पड़ता है। लेकिन अगर आपने सही तरीके से अपनी पोस्ट का On-Page SEO कर लिया तो फिर इस बात के chances बहुत ज्यादा  बढ़ जाते हैं कि आपकी वेबसाइट Off-Page SEO किए बिना या फिर backlinks बनाए बिना ही सर्च इंजन पर रैंक करने लगेगी।

इसीलिए अगर आप अपनी वेबसाइट को search engines के results में रैंक करवाना चाहते हैं तो आपको on-page SEO को अच्छे से समझना और implement करना पड़ेगा।

On-Page SEO करने के लिए जरुरी requirements :-

On-Page SEO करने के लिए आपको दो चीजों की जरुरत होती है :-

१) कॉन्टेंट (images के साथ )।
२) कीवर्ड्स (जिसपर आप अपनी पोस्ट को target करना चाहते हैं)।

तो चलिए समझते हैं एक-एक point को:-

१) कॉन्टेंट (images के साथ ):- आपका कॉन्टेंट unique और अच्छी क्वॉलिटी का होना चाहिए। unique मतलब कि कॉपी किया हुआ कॉन्टेंट नहीं होना चाहिए। इसे चेक करने के लिए आप free plagiarism checker tool जैसे कि smallseotool या फिर premium tool copyscape का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपका कॉन्टेंट copied है तो गूगल या फिर कोई भी सर्च इंजन आपकी पोस्ट को रैंक नहीं करेगा। अच्छी क्वालिटी कॉन्टेंट का मतलब यह होता है कि ऐसा कॉन्टेंट जो आपके visitors को संतुष्ट कर सके। एक example के तौर पर मान लीजिए कि आपने एक पोस्ट लिखी है (How to invest in share market?) तो इसका मतलब यह होना चाहिए कि जब लोग सर्च इंजन पर (How to invest in share market?) कीवर्ड को सर्च करें और आपकी पोस्ट पर आएं तो उनको अच्छे तरीके से यह समझ में आना चाहिए कि शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कैसे किया जाता है और उनके अंदर यह विश्वास पैदा होना चाहिए कि जिस किसी ने भी यह पोस्ट लिखी है उसे शेयर मार्केट का अच्छा खासा knowledge है। जैसे कि आप मेरा यह  On-Page SEO ka ब्लॉग पढ़ रहे हैं तो आप मुझपर विश्वास कर सकते हैं कि On-Page SEO के बारे में मैं जो भी बातें बताऊँगा वह सही मायने में असरदार होंगी।

तो आपका कॉन्टेंट visitors को संतुष्ट करना चाहिए और आपके  कॉन्टेंट की आदर्श लम्बाई १५००-१८०० शब्दों की होनी चाहिए। आपको अपने पोस्ट में  images भी लगनी या फिर खुद से बनानी पड़ेंगी जो कि आप Pixabay, Canva ,Pexels जैसी वेबसाइट के माध्यम से पूरा कर सकते हैं।सिर्फ थोड़ी सी कोशिश करके आप canva या फिर photoshop से अच्छी images बना सकते हैं।

२) कीवर्ड्स (जिसपर आप अपनी पोस्ट को target करना चाहते हैं):- दूसरी main चीज है कीवर्ड्स। आपको कौन से कीवर्ड्स पर अपनी पोस्ट को रैंक करवाना है उसकी लिस्ट आपके पास होनी बहुत ही जरुरी है।यह आप कीवर्ड रिसर्च करके पता लगा सकते हैं। कीवर्ड रिसर्च बहुत ही जरूरी होता है। अगर आपने कोई जरुरी कीवर्ड miss कर दिया तो आप लाखों रुपए miss कर सकते हैं जो कि आप कमा सकते थे। जैसे कि ऊपर दिए गए स्टॉक मार्केट की पोस्ट के example को लें तो उसका main/targeted कीवर्ड है (How to invest in share market?)

Keyword Research

इसका monthly सर्च volume 22,200 है। लेकिन अगर आपने कीवर्ड रिसर्च सही से नहीं किया और आपने एक दूसरा जरुरी कीवर्ड (How to invest in stock market?) जिसका मतलब (How to invest in share market?) के समान है और monthly सर्च volume 5400  है को miss कर दिया तो आपको लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है।

How to do Secondary Keyword Research for On-Page SEO.

इसीलिए आपका कीवर्ड रिसर्च आपके लिए जरूरी होने के साथ-साथ बिल्कुल परफेक्ट भी होना चाहिए। कीवर्ड रिसर्च के लिए काफी सारे टूल्स उपलब्ध है जैसे कि :-


इन सब में सबसे ज्यादा नामी और यूज़ किया जाने वाला टूल ahrefs hai लेकिन यह फ्री नहीं है। अब आपको इन टूल्स की मदद से primary कीवर्ड (main keyword जिसपर आपको अपनी पोस्ट लिखनी है ) के साथ-साथ  8-10 secondary कीवर्ड (समान अर्थ वाले कीवर्ड )खोजने पड़ेंगें। जैसे कि :-

1 How to invest in share market? (Primary Keyword )
2 How to invest in stock market? (Secondary Keyword )
3 How to invest in shares? (Secondary Keyword )
4 How to invest in share market for beginners? (Secondary Keyword )

On-Page SEO कैसे करें?(On-Page SEO tutorial in Hindi)
तो चलिए मान लेते हैं कि आपके पास कीवर्ड्स के साथ-साथ आपकी पोस्ट के लिए content भी उपलब्ध है। 

अब हम अपनी पोस्ट का on page seo नीचे दिए गए पॉइंट्स के अनुसार करेंगें। लोगों को लगता है कि पोस्ट का on page seo करना बहुत ही कठिन होता है और इसे करने के लिए काफी टेक्निकल knowledge की जरुरत होती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता और यह बेहद आसान होता है।

On-Page SEO checklist:-
१ ) अपनी पोस्ट के टाइटल में main कीवर्ड्स का इस्तेमाल करें। 

मान लेते हैं कि हमारी पोस्ट के लिए हमारा main कीवर्ड है:- How to invest in share market.

तो हमारी पोस्ट का टाइटल कुछ इस तरह से होना चाहिए:-

A complete guide on how to invest in share market.

तो ऊपर दिए गए टाइटल में आप देख सकते हैं कि हमने कैसे main keyword का इस्तेमाल टाइटल में किया है।

२ ) अपने पोस्ट के टाइटल में secondary कीवर्ड्स के modifiers का इस्तेमाल करें। 

Secondary कीवर्ड्स वह कीवर्ड्स होते हैं जिनका अर्थ Main कीवर्ड्स के समान होता है।
जैसे कि:-

Main Keyword:- How to invest in share market.
Secondary Keyword:- How to invest in stock market.

दोनों कीवर्ड्स का अर्थ समान ही है।

Modifiers secondary कीवर्ड के साथ इस्तेमाल होने वाले शब्द होते हैं जो कि उसे modify करते हैं।

उदाहरण के तौर पर:-

What are Modifiers in Secondary Keywords for On-Page SEO?

तो secondary कीवर्ड्स के modifier के इस्तेमाल के साथ हमारी पोस्ट का title कुछ ऐसा होना चाहिए :-

A complete guide on how to invest in share market for beginners. 

अब जान लेते हैं कि टाइटल को ब्लॉगर में कैसे डालना है:-

ब्लॉगर में आप इसे direct post के post title में डाल सकते हैं।


How to add Post Title in Blogger?


वर्डप्रेस में डालने के लिए आप yoast plugin की सहायता ले सकते हैं।


How to add Post Title in wordpress?

३ )पोस्ट के URL को छोटा और simple रखें और main कीवर्ड्स का इस्तेमाल slug में जरूर करें। 

Slug पोस्ट के URL का वो हिस्सा होता है जो कि एक पेज के कॉन्टेंट की जानकारी आपको देता है :-

What is Slug optimization in URL for SEO?

तो हमारे पोस्ट की URL के slug में main कीवर्ड्स का इस्तेमाल करने के बाद हमारे पोस्ट की URL कुछ इस तरह से दिखेगी:-

  https://xyz.com/how-to-invest-in-share-market/

४ ) Main कीवर्ड्स का इस्तेमाल पहले और आखरी paragraph में जरूर करें। 

उदहारण के तौर में:-

मान लीजिए आपका पहला paragraph कुछ इस तरह से है:-

Everyone wants to make money & become rich quickly, and we Indians are no exception to this rule. It is this single-minded obsession that drives lakhs of peoples across the country to research How to invest in share market? every year.

तो इस paragraph में हमने main कीवर्ड (How to invest in share market? ) का इस्तेमाल किया है

इसी तरह से आपके पोस्ट के कॉन्टेंट का जो आखरी paragraph होगा उसमे भी आप अपने main कीवर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

५ ) आपके पूरे पोस्ट में main कीवर्ड की density 0.5 % तक ही होनी चाहिए।

अब आप यही सोच रहे होंगें कि आखिर यह कीवर्ड density होती क्या है ? तो इसका मतलब यह होता है कि आप अपने main कीवर्ड को अपने पूरे पोस्ट में कितनी बार इस्तेमाल करते हैं।

मान लीजिये कि आपकी पोस्ट 1000 शब्दों की है , तो 1000 का 0.5 % = 5 होता है ,यानी कि आपके पूरे पोस्ट में main कीवर्ड का इस्तेमाल 5 बार तक जरूर होना चाहिए और ध्यान रहे कि 5 बार से अधिक नहीं होना चाहिए।

ऐसे ही आप अपनी पोस्ट की लम्बाई के अनुसार अपने main कीवर्ड की density निकाल सकते हैं।

६ ) आपके पोस्ट के main कीवर्ड का इस्तेमाल एक या फिर एक से अधिक sub-heading में जरूर होना चाहिए। 
आप सभी sub-heading से परिचित तो जरूर होंगें।

उदहारण के तौर पर:-

How to invest in share market:- (main heading )

How can we earn money by investing in share market:- (sub-heading)

Best ways to invest in share market:- (sub-heading)

तो अपने sub-heading में main कीवर्ड का इस्तेमाल जरूर करें।

७ ) आपके पूरे पोस्ट में secondary कीवर्ड की density 0.2-0.5 % तक ही होनी चाहिए।

कीवर्ड density क्या होती है और कैसे निकालनी है उसके बारे में मैंने आपको ५ नंबर पॉइंट में बताया ही है। उसी के अनुसार आपको ध्यान रखना है कि आपके पोस्ट के secondary कीवर्ड्स की density 0.2-0.5 % तक ही होनी चाहिए। ध्यान रहे कि density ना तो उससे कम हो और ना ही ज्यादा हो।

८ ) अपने पोस्ट की पहली image में अपने main कीवर्ड को alt tag के रूप में जरूर उपयोग करें। 

Image का alt tag सर्च इंजन को उस image के टॉपिक और उसके उद्देश्य के बारे में बताता है।

ब्लॉगर के लिए:-

इसे कैसे करते हैं आप नीचे दिए गए चित्र से जान सकते हैं:-

अपनी इमेज को पोस्ट में add karein और उसपर क्लिक करें।

How to Add Title Text & Alt Text in Image of Blogger?


फिर नीचे दिए गए options में properties पर क्लिक करें

How to add Title Text & Alt Text in Image of Blogger?

अब properties पर क्लिक करने के बाद आपको दो options मिलते हैं:-
१) title text :- जो कि आप कुछ भी डाल सकते हैं।
२) alt text :- जो कि आपका main कीवर्ड होना चाहिए।


How to add Title Text & Alt Text in Image of Blogger?

ध्यान रहे :-आपकी image जो भी आप डाल रहे हो आपकी alt text कीवर्ड से related होनी चाहिए।

वर्डप्रेस के लिए:-

 वर्डप्रेस में आपको दाहीने साइड में alt text का अलग से option मिलता है जिसका आप इस्तेमाल alt text डालने के लिए कर सकते हैं।

How to add Title Text & Alt Text in Image of wordpress?


९ ) अपने main कीवर्ड और secondary कीवर्ड का इस्तेमाल meta description में जरूर करें।

Meta Description आपकी वेबसाइट और उससे जुड़े posts की जानकारी search engine और visitors को देता है।

जैसे कि आपने एक पोस्ट लिखी है (how to invest money in share market ) और जब भी कोई उसे सर्च करेगा तो वह search engine के result में कुछ इस प्रकार से दिखेगी।

What is Meta Description?

और सर्च इंजन भी आपके meta description में use किए गए keywords के आधार पर ही आपकी वेबसाइट को सर्च\results में दिखाता है।

इसीलिए meta description में अपने main कीवर्ड और secondary कीवर्ड का इस्तेमाल करना on page seo का एक जरुरी भाग है।

ब्लॉगर में add करने के लिए आप इसे search description बॉक्स में add कर सकते हैं।

How to add Meta Description in Blogger?


वर्डप्रेस में add करने के लिए आप yoast plugin की मदद ले सकते हैं।

How to add  Meta Description in wordpress for On-Page SEO?


१० ) छोटे paragraphs का इस्तेमाल करें।

आपकी पोस्ट में paragraphs बहुत जादे लम्बे नहीं बल्कि छोटे होने चाहिए। कोशिश करें कि paragraphs की आदर्श लम्बाई ५०-१०० शब्दों तक ही हो।

११ ) h1 से  h6 तक अपने पोस्ट के titles/sub-headings को चिन्हित करें।

main title या हैडिंग को h1
sub-headings को (h2 से लेकर h6 तक )

ब्लॉगर में कैसे करें:-

आप ब्लॉगर में heading, sub-heading या फिर minor-heading के तौर में इसे select कर सकते हैं।

How to add H1,H2,H3,H4,H5,H6 in heading of blogger?


और वर्डप्रेस में आप इसे हैडिंग के ऊपर क्लिक करके चिन्हित कर सकते हैं।

How to add H1,H2,H3,H4,H5,H6 in heading of wordpress?


१२ ) जरुरी शब्दों को highlight जरूर करें

जब आप अपने पोस्ट को पढ़ें और आपको लगे कि कोई भी शब्द या लाइन पर आपके पोस्ट के readers का ध्यान जाना बहुत जरुरी है तो उसे highlight जरूर करें।

१३ ) अपनी पोस्ट पर internal links जरूर add करें।

internal links वो links होती हैं जिन्हें आप अपनी पोस्ट में डालते हो और वो लिंक्स आपके वेबसाइट के ही कॉन्टेंट की ओर पॉइंट करती हैं। मान लीजिए आप एक पोस्ट लिख रहे हैं और उस पोस्ट के किसी भी topic से related आपके पास पहले से ही लिखी हुई कोई दूसरी पोस्ट है तो आप उसका लिंक अपने पोस्ट में add कर सकते हैं। इसे कहते हैं internal links add करना। आपकी पोस्ट में जितने जादे internal links होंगें आपकी पोस्ट के SEO के लिए यह उतना ही फायदेमंद होगा।

उदहारण के लिए:-

How to add Internal links for On-Page SEO?

तो ऊपर दिए paragraph में आप देख सकते हैं कि internal link (SEO-optimizing) को किस प्रकार पोस्ट के साथ जोड़ा गया है।

१४ ) अपनी पोस्ट पर external links जरूर add करें।

external links वो links होती हैं जिन्हें आप अपनी पोस्ट में डालते हो और वो लिंक्स किसी दूसरी वेबसाइट की ओर पॉइंट करती हैं। यह लिंक्स visitors को अधिक जानकारी प्राप्त करवाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। external links गूगल के नज़रिये से आपकी पोस्ट के लिए एक positive signal माना जाता है। आप जब कभी अपनी पोस्ट लिखें तो उसमे जो जरूरी words हों उनपर external links जरूर ऐड करें।

उदाहरण के लिए:-

How to add External links for On-Page SEO?


तो आप देख सकते हैं कि ऊपर के paragraph में (वेब सर्वर) वाले शब्द में external link को add किया गया है जो कि wikipedia की वेबसाइट की ओर पॉइंट करती है।

१५ ) अपने पोस्ट के टाइटल और meta-description को आकर्षक बनाएं। 

आपकी पोस्ट का टाइटल और meta-description काफी आकर्षक होना चाहिए ताकि लोग अन्य सारे सर्च results को छोड़ कर आपके वेबसाइट के सर्च result पर ही क्लिक करें।

१६ ) अपनी पोस्ट में सोशल share buttons का इस्तेमाल करें।

अपनी पोस्ट में सारे सोशल शेयर buttons को जरूर ऐड करें।

Add Social Media Sharing Buttons for On-Page SEO.
१७ ) अपने पेज स्पीड को बेहतर बनाएं। 

सर्च engines पेज स्पीड को बहुत ज्यादा वैल्यू देते हैं। आपकी वेबसाइट के पेज जितनी जल्दी खुलेंगें सर्च engines आपकी वेबसाइट को उतना ही ऊपर रैंक करवाएंगें।

१८ ) अपने वेबसाइट का bounce rate कम रखें। 

bounce rate आपके वेबसाइट पर visitors के रुकने की अवधि से calculate किया जाता है। मान लीजिये कि आपने अपनी वेबसाइट पर बहुत ही रोचक और महत्वपूर्ण कॉन्टेंट डालें हैं और visitors आपकी वेबसाइट पर आने के बाद काफी लम्बे समय तक रुकते हैं ताकि ज्ञान या फिर information जो आपकी वेबसाइट प्रदान कर रही है उसे ग्रहण किया जा सके। तो समझ लीजियेगा कि आपकी वेबसाइट का bounce rate बहुत ही कम है और आपकी वेबसाइट के SEO के लिए यह बहुत ही फायदेमंद है।

लेकिन अगर इससे उल्टा अगर visitors आपकी वेबसाइट पर ज्यादा समय नहीं टिकते ,रोचक और महत्वपूर्ण कॉन्टेंट की कमी के कारण तो आपकी वेबसाइट का bounce rate बहुत ज्यादा है और यह आपकी वेबसाइट के SEO के लिए काफी नुकसानदेह है।

निष्कर्ष:-

तो आपने इस पूरी पोस्ट में On-Page SEO क्या होता है? What is On-Page SEO? के बारे में पढ़ा और जाना। मैं यही आशा करता हूँ कि आप सभी को On-Page SEO के बारे में समझ आ गया होगा। 

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तो आप नीच दिए गए comments section में अपने comments कर सकते हैं। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मौका मिलेगा.

वेब होस्टिंग क्या है? What is Web Hosting in Hindi?

अगर आप एक प्रोफेशनल वेबसाइट बनाने की सोच रहे हैं तो फिर आपको वेब होस्टिंग के बारे में जानना बहुत जरुरी है। इस ब्लॉग के जरिए मैं आपको बताऊँगा कि वेब होस्टिंग क्या होती है,कितने प्रकार की होती है और किस तरह से काम करती है। तो चलिए जानते हैं कि वेब होस्टिंग क्या है? What is Web Hosting in Hindi?

वेब होस्टिंग क्या है? What is web hosting?

वेब होस्टिंग क्या है?(Web Hosting in Hindi)

वेब होस्टिंग सेवा एक इंटरनेट सेवा होती है। यह सेवा आपकी वेबसाइट को इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है। जब आप एक वेब होस्टिंग सेवा खरीदते हैंतो वेब होस्टिंग सेवा आपके वेबसाइट के लिए अपने वेब सर्वर पर कुछ जगह किराए पर प्रदान करती है,जिस पर आप अपनी वेबसाइट की सारी आवश्यक फाइलेेें और डेटा को स्टोर कर सकते हैं। 

अब शायद आप सोच रहे होंगें कि यह वेब सर्वर क्या होता है?

वेब सर्वर एक special computer होता है जहाँ पर आपके वेबसाइट  की सारी जरूरी सामग्री जैसे कि चित्र,टेक्स्ट और फाइलों को स्टोर करके रखा जाता है। 

यह special computer साल के 365 दिन 24 घंटे बिना किसी रुकावट के चलता है और इंटरनेट से जुड़ा रहता है ताकि आपकी वेबसाइट किसी भी वक्त हर उस व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो सके जो इसे देखना चाहता है।

इसी वेब सर्वर की वजह से किसी भी व्यक्ति या organization की वेबसाइट को इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में और किसी भी वक़्त देखा जा सकता है। 

वेब होस्टिंग कैसे काम करती है?

सरल भाषा में वेब होस्टिंग आपके वेबसाइट को अपने वेब सर्वर पर जगह प्रदान करती है। वेब होस्टिंग एक घर किराए पर लेने के समान ही काम करती है। जैसे घर किराए पर लेने से आपको एक घर में रहने की जगह मिलती है,ठीक वैसे ही एक वेब होस्टिंग सर्विस के साथ sign up करने से आपको अपने वेबसाइट की जरूरी सामग्री जैसे कि(टेक्स्टचित्रफाइल) स्टोर करने के लिए वेब सर्वर पर जगह मिल जाती है,और उस जगह के लिए आपको नियमित रूप से उस वेब होस्टिंग के किराए का भुगतान करना पड़ता है।

जब भी कोई आपके डोमेन नाम को अपने ब्राउज़र के एड्रेस बार में टाइप करता है,जैसे कि www.xyz.com ,तो internet आपके domain के नाम को आपके वेब होस्ट के सर्वर के साथ जोड़ देता है जहाँ आपकी सारी सामग्री (टेक्स्टचित्रफाइल)स्टोर होती हैं और आवश्यकता के अनुसार यूजर के कंप्यूटर तक सभी फाइलों को transfer कर दिया जाता है।यूजर फिर अपनी जरुरत के अनुसार उन फाइलों को देखता है और ज्ञान ग्रहण करता है।  


आपकी वेबसाइट के लिए सर्वर स्पेस प्रदान करने के अलावाहोस्टिंग प्रदाता आपकी वेबसाइट प्रबंधन से सम्बंधित अन्य सेवाएँ भी प्रदान कर सकते हैंजैसे:-  

  • SSL प्रमाणपत्र 


  • Page builders

  • Developer tools

  • ग्राहक सहायता सेवा (अक्सर लाइव चैट के साथ) 

  • Automated website backups

  • One-click software installs (e.g. for WordPress or Drupal) 

विभिन्न प्रकार की वेब होस्टिंग:-

अधिकांश वेब होस्ट विभिन्न प्रकार की होस्टिंग प्रदान करते हैं ताकि वे अपने विभिन्न ग्राहकों की ज़रूरतों को पूरा कर सकें। 

वेब होस्ट द्वारा अक्सर पाँच प्रकार की होस्टिंग सेवा प्रदान की जाती है:- 
  • Shared Hosting
  • VPS Hosting
  • Cloud Hosting
  • WordPress Hosting
  • Dedicated Server Hosting

1) Shared Hosting:-

Shared Hosting वेब होस्टिंग का सबसे आम प्रकार है और यह अधिकांश छोटे व्यवसायों और ब्लॉगों के लिए एक सबसे अच्छा समाधान है। जब आप शब्द "वेब होस्टिंग" सुनते हैं,तो स्पीकर आमतौर पर Shared Hosting को संदर्भित करता है। Shared Hosting के साथ,आप अपने होस्टिंग प्रदाता के अन्य ग्राहकों के साथ एक सर्वर साझा करते हैं। एक ही सर्वर पर होस्ट की जाने वाली वेबसाइटें अपने सभी resources को जैसे मेमोरी, कंप्यूटिंग पावर, डिस्क स्पेस,आदि आपस में साझा करती हैं। 

Shared Hosting के फायेदे:-
  • इस होस्टिंग को कम लागत में खरीदा जा सकता है। 
  • इस होस्टिंग का इस्तमाल और सेटअप बहुत आसान होता है।
  • control panel बहुत ही यूजर फ्रेंडली होता है। 
  • छोटे व्यवसायों और ब्लॉगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। 
Shared Hosting के नुक्सान:-
  • सर्वर कॉन्फ़िगरेशन पर थोड़ा या कोई नियंत्रण नहीं। 
  • अन्य वेबसाइटों पर ट्रैफ़िक बढ़ने से आपकी साइट धीमी हो सकती है
  • इसके security features उतने अच्छे नहीं होते। 
  • इसमें प्रायः सभी होस्टिंग कम्पनियाँ उतना अच्छा customer support प्रदान नहीं करती हैं। 

2) VPS Hosting:-

यह एक प्रकार की होस्टिंग है,जहाँ आपकी वेबसाइट को एक shared सर्वर पर होस्ट किया जाता है, लेकिन फिर भी आपकी वेबसाइट पर मेमोरी, स्टोरेज स्पेस, बैंडविड्थ आदि जैसे संसाधन, dedicated होस्टिंग की तरह उपलब्ध कराए जाते हैं 

इसका मतलब है कि आपको अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ होस्टिंग resources साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। VPS Hosting मूल रूप से shared और dedicated होस्टिंग का एक संयोजन है, इसका मतलब है कि एक shared होस्टिंग में, आपको एक dedicated प्रकार की होस्टिंग मिलती है।

इसलिए VPS होस्टिंग की लागत shared होस्टिंग से अधिक और dedicated होस्टिंग से कम होती है।

 VPS Hosting के लाभ :-
  • Dedicated सर्वर संसाधन (Dedicated सर्वर के लिए भुगतान किए बिना)
  • इसमें dedicated hosting की तरह आपके पास पूरा नियंत्रण होता है।  
  • अन्य वेबसाइटों पर ट्रैफ़िक बढ़ने से आपके वेबसाइट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है
  • इसकी प्राइवेसी और security फीचर्स अच्छे होते हैं  
  • यह dedicated hosting से काफी कम लागत में खरीदी जा सकती है। 
  • इसमें customer support service काफी अच्छी होती है। 
VPS Hosting के नुक्सान :-
  • Shared होस्टिंग की तुलना में अधिक महंगा है। 
  • तकनीकी और सर्वर प्रबंधन ज्ञान ज़रूरी होता है। 

3) क्लाउड होस्टिंग:-

क्लाउड होस्टिंग वर्तमान के बाज़ार में सबसे विश्वसनीय समाधान है। क्लाउड होस्टिंग के साथ, आपका होस्ट आपको सर्वरों का एक समूह प्रदान करता है। आपकी फ़ाइलों और संसाधनों को प्रत्येक सर्वर पर दोहराया जाता है। जब कोई क्लाउड सर्वर व्यस्त होता है या कोई समस्या होती है, तो आपका ट्रैफ़िक स्वचालित रूप से समूह के किसी अन्य सर्वर पर रूट हो जाता है। 


क्लाउड होस्टिंग के लाभ :-
  • सर्वर डाउन का आपकी साइट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 
  • आपकी वेबसाइट पर आने वाली हाई ट्रैफिक को भी आसानी से manage किया जा सकता है। 
  • वीपीए होस्टिंग से अधिक मापनीय। 
क्लाउड होस्टिंग के नुक्सान :-
  • लागत का अनुमान लगाना कठिन है। 
  • रूट एक्सेस हमेशा प्रदान नहीं किया जाता है।  

4) वर्डप्रेस होस्टिंग:-

वर्डप्रेस होस्टिंग एक shared होस्टिंग का ही रूप है,जो वर्डप्रेस वेबसाइट के owners के लिए बनाई गई है। आपका सर्वर विशेष रूप से वर्डप्रेस के लिए ही कॉन्फ़िगर किया जाता है और आपकी साइट की caching  और security  जैसी महत्त्वपूर्ण चीजों के लिए pre -installed  प्लगइन्स के साथ आती है। अत्यधिक optimized कॉन्फ़िगरेशन के कारण, आपकी साइट बहुत तेज़ी से लोड होती है और कम समस्याओं के साथ चलती है। वर्डप्रेस होस्टिंग योजनाओं में अक्सर अतिरिक्त वर्डप्रेस-सम्बंधित विशेषताएँ शामिल होती हैं, जैसे कि पूर्व-डिज़ाइन किए गए वर्डप्रेस थीम, drag & drop पेज बिल्डर  और विशिष्ट डेवलपर टूल। 

वर्डप्रेस होस्टिंग के लाभ :-
  • कम लागत।(shared होस्टिंग के समान लागत पर अक्सर उपलब्ध) 
  • Beginners के लिए अनुकूल। 
  • वर्डप्रेस इंस्टालेशन एक-क्लिक में किया जा सकता है। 
  • वर्डप्रेस साइटों के लिए अच्छा performance
  • ग्राहक सहायता टीम वर्डप्रेस के मुद्दों में प्रशिक्षित होती है। 
  • वर्डप्रेस प्लगइन्स और थीम पहले से ही installed रहते हैं। 
वर्डप्रेस होस्टिंग के नुक्सान :- 
  • केवल वर्डप्रेस साइटों के लिए recommended(यह एक issue बन सकता है यदि आप अपने सर्वर पर एक से अधिक वेबसाइटों को होस्ट करना चाहते हैं और उनमें से सभी साइटेेँ वर्डप्रेस का उपयोग नहीं करती हैं) 

5) Dedicated होस्टिंग:-

Dedicated होस्टिंग का मतलब है आपका अपना सर्वर होना जो पूरी तरह से आपकी साइट के लिए समर्पित हो। इसलिए, dedicated होस्टिंग आपको अविश्वसनीय flexibility देती है। आप अपनी इच्छानुसार अपने सर्वर को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं, ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं जिसे आप उपयोग करना चाहते हैं और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पूरे होस्टिंग वातावरण को सेट कर सकते हैं। 

वास्तव में, एक dedicated सर्वर को किराए पर लेना अपने स्वयं के on site सर्वर के मालिक होने जैसा ही शक्तिशाली होता है, लेकिन आपके वेब होस्ट के professional समर्थन के साथ।
  
Dedicated होस्टिंग के लाभ :-
  • सर्वर कॉन्फ़िगरेशन पर पूरा नियंत्रण। 
  • उच्च विश्वसनीयता।(आपको अपने सर्वर के संसाधनों को किसी के साथ साझा करने की जरुरत नहीं होती हैं) 
  • अपने सर्वर के लिए root access
  • उच्च सुरक्षा।
Dedicated होस्टिंग के नुक्सान:-
  • उच्च लागत। 
  • तकनीकी और सर्वर प्रबंधन ज्ञान होना ज़रूरी। 

होस्टिंग लेने से पहले कौन सी बातों का ध्यान रखें ?
आपको अपनी वेबसाइट के लिए एक अच्छा वेब होस्टिंग प्रदाता,बिना पहले यह जाने कि आपको क्या चाहिए कभी नहीं मिल सकता है।एक वेब होस्ट चुनने की दिशा में पहला कदम अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं को समझना और फिर सर्वश्रेष्ठ वेब होस्टिंग सेवा को चुनना है।

क्या आपको backup solution  या उच्च गति वाले इंटरनेट की आवश्यकता हैक्या आपको अपनी होस्टिंग के लिए एक c Panel की आवश्यकता है या क्या आपको एक डोमेन की आवश्यकता हैये ऐसे कुछ सवाल हैंजिन्हें आपको अपनी वेबसाइट की ज़रूरतों को समझने के लिए खुद से पूछने चाहिए। बाजार में दर्जनों वेब होस्टिंग प्रदाता हैं जो आपको आपकी वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर सेवाएं प्रदान करते हैं। फास्ट लोडिंग गति, 24/7 customer support , मुफ्त डोमेन नाम और कई अन्य सुविधाएँ ग्राहक को दी जाती हैं। एक ग्राहक के रूप मेंआपको वेब होस्टिंग कंपनियों और उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के पैकेज पर अपना शोध करने की आवश्यकता है ताकि आप सर्वश्रेष्ठ वेब होस्टिंग प्रदाता चुनने के लिए अन्य कंपनियों के साथ कीमतों की तुलना कर सकें। 

इस लेख मेंमैं 10 चीजें साझा करने जा रहा हूं ताकि आप वेब होस्टिंग सेवा का विकल्प चुन सकें। कुछ चीजें हैं जिनपर आपको विचार करने की आवश्यकता है जैसे कि डाउनटाइम और कीमत,जो आपके व्यवसाय के बजट के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं ताकि आप केवल उन सेवाओं पर चालाकी से खर्च कर सकें जो वास्तव में पैसे के लायक हैं। 

1. पहली बार खरीद बनाम नवीकरण लागत 
होस्टिंग सेवा खरीदने से पहलेआपको हमेशा सेवा की पहली बार खरीद और नवीकरण शुल्क के मूल्य की जांच करनी चाहिए। अधिकांश होस्टिंग कंपनियां रियायती मूल्य पर पहली बार सेवा प्रदान करती हैंलेकिन जब यह सेवा नवीनीकृत करने का समय होता है तो कंपनी आपसे दोगुना शुल्क लेती है। इसे आप धोखाधड़ी भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि आपको कंपनी ने सेवा रियायती दर पर दी थी और अब मूल शुल्क लिया जा रहा है।इसीलिए इन सब बातों पर ध्यान रखना बहुत ही जरुरी है।  
2. समर्थन 
देखें कि क्या आप जिस होस्टिंग प्रदाता को खरीदने का विचार कर रहे हैंवह आपके द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं या प्रश्नों के लिए lifetime या 24/7 सहायता प्रदान करता है। जब भी आपको अपने होस्टिंग को लेकर support की आवश्यकता होती हैतो सहायता टीम को आपके प्रश्नों को न्यूनतम समय में हल करने की छमता होनी चाहिए। 
3. बैक-अप / सुरक्षा
आपका वेब होस्टिंग प्रदाता भी ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित नहीं है इसीलिए वेब होस्टिंग भी आपके डेटा की सुरक्षा की बारीकी से गारंटी नहीं देता और इसीलिए आपके वेबसाइट के डाटा की नियमित बैकअप आपके होस्टिंग प्रदाता द्वारा और आपके द्वारा बहुत ही जरुरी है ।यह सुनिश्चित करेगा कि आपका डेटा सुरक्षित है और उसकी कई सारी बैकअप कॉपियाँ हैं ताकि आप जब चाहें अपना डेटा पुनः प्राप्त कर सकते हैं।
4. अपटाइम और डाउनटाइम 
आपको ऐसे होस्टिंग प्रदाता की सख्त आवश्यकता हैजिसकी अधिकतम अपटाइम के लिए मजबूत प्रतिष्ठा रही हो। ऐसी होस्टिंग सेवा चुनें जिसका पूरे साल में 99.99% अपटाइम और न्यूनतम डाउनटाइम हो जिससे उसके ग्राहकों और ग्राहकों के व्यवसाय को नुकसान ना हो।  
5. नियम और शर्तें 
होस्टिंग सेवाओं के बहुत तरह के नियम और शर्तें होती हैं और आपको उन शर्तों को स्वीकार करने या सेवा का उपयोग शुरू करने से पहले उन सभी को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। कंपनी और सेवा नीतियों के बारे में प्रश्न पूछें ताकि आप बाद में किसी भी नियम उलंघन में ना फसें । इसमें एक निकास रणनीति भी शामिल होती है जो इस बारे में होती है कि अगर आपको अपने सेवा प्रदाता की सेवाएं पसंद नहीं आई तो आप किस तरह से सेवा छोड़ सकते हैं और अपने सेवा प्रदाता को बदल सकते हैं। 
6. समीक्षा और रेटिंग 
लोग हमेशा होस्टिंग प्रदाता के साथ अपने अनुभव के आधार पर किसी विशेष सेवा को अच्छा या बुरा बताते हैं। ऑनलाइन आप विभिन्न होस्टिंग प्रदाताओं के बारे में कई समीक्षाएँ पा सकते है जो आपको सही विकल्प की ओर ले जाएगा। होस्टिंग कंपनियों को यहां तक ​​कि उनके ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली सारी सेवाओं के आधार पर भी रेट किया जाता है। 
7. मूल्य और पैकेज की तुलना 
जैसा कि मैंने पहले कहाबाजार में दर्जनों होस्टिंग प्रदाता हैं जो अपने पैकेज द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सेवाओं को बाकियों से अच्छा होने का दावा करते हैंलेकिन एक ग्राहक के रूप मेंसबसे अच्छे होस्टिंग पैकेज के लिए शोध करना आपकी जिम्मेदारी बनती है। ऐसे पैकेज ही चुने जो आपके व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। विभिन्न होस्टिंग प्रदाताओं के पैकेजों की तुलना करें, सभी पैकेजों और उनके मूल्य की विशेषताओं की तुलना करें जो कि आपकी वेबसाइट के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। 
8. डोमेन 
ग्राहकों के रूप मेंहम हमेशा उस उत्पाद या सेवा को पसंद करते हैं जिसके साथ हमें कुछ मुफ्त मिले और इसी परिदृश्य को नज़र में रखते हुए ,कुछ होस्टिंग कंपनियां अपने साथ पहली बार जुड़ने वाले ग्राहकों को मुफ्त डोमेन प्रदान करती हैं। एक और पहलू है जिसपर आपको ध्यान देने की जरूरत हैकि आप एक ही होस्टिंग सेवा पर एक से अधिक डोमेन होस्ट कर सकते हैं कि नहीं। ऐसी सेवा चुनें जहां आप एक ही सर्वर पर दो से अधिक वेबसाइट चला सकें।
9. रिफंड पॉलिसी 
यह एक महत्वपूर्ण पॉइंट है क्योंकि जब आप एक निश्चित होस्टिंग सेवा के ग्राहक होते हैं और आप उसकी सेवा से संतुष्ट नहीं होते ,उस स्थिति में आपको सेवा को बंद करने और किसी अन्य सेवा प्रदाता से जुड़ने की आवश्यकता होती है। इस स्तिथि में क्या आपका होस्टिंग सेवा प्रदाता आपको आपके पैसे refund  या  सेवा रद्द करता है या नहीं। इस बारे में जरूर निश्चित हो जाएँ।    
10. cPanel 
सभी होस्टिंग कंपनियां cPanel Plesk के माध्यम से आपकी होस्टिंग को प्रबंधित करने के लिए standard  तरीके प्रदान करती हैं। यह ग्राहकों के लिए एक बहुत ही बुनियादी आवश्यकता है लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या कोई होस्टिंग प्रदाता है जो आपसे इस सेवा के लिए शुल्क ले रहा है क्योंकि अधिकांश कंपनियां इसे मुफ्त में प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष 

वेब होस्टिंग प्रदाता आपको सभी प्रकार की सेवाएँ देने का वादा करते हैं लेकिन आपको हमेशा इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपको कौन से पैकेज दिए जा रहे हैं और इसके लिए आपसे कितना शुल्क वसूला जा रहा है।  

कौन सी कम्पनियाँ वेब होस्टिंग की सेवा प्रदान करती हैं 
बहुत सारी कम्पनियां वेब होस्टिंग सेवा प्रदान करती हैं लेकिन जो सबसे अच्छी और नामी हैं :- 
  • Hostgator India 
  • Godaddy
  • BlueHost
  • BigRock
  • SiteGround 


वेब होस्टिंग और डोमेन नाम के बीच अंतर

एक वेब होस्टिंग सेवा के लिए साइन अप करने के अलावाआपको एक डोमेन नाम खरीदने की भी आवश्यकता होती है। 

जबकि वेब होस्टिंग आपको अपनी साइट के लिए एक सर्वर स्थान किराए पर लेने की अनुमति देता हैडोमेन नाम आपकी साइट का पता होता है-उदाहरण के लिएडोमेन का नाम xyz .com है। जब आपके उपयोगकर्ता आपकी साइट को access करना चाहेंगेंतो वे अपने ब्राउज़र के एड्रेस बार में डोमेन नाम xyz.com टाइप करेंगें और आपका सर्वर उस xyz.com के data को ट्रांसफर कर देगा जिसके लिए उपयोगकर्ता ने अनुरोध किया होगा। 

अधिकांश वेब होस्ट के साथआपको अपना डोमेन नाम अलग से खरीदना होता है। यायदि आप पहले से ही एक डोमेन नाम के मालिक हैंतो आप इसे अपने वर्तमान होस्टिंग प्रदाता के साथ भी जोड़ सकते हैं।होस्टिंग प्लान की तरह,आपको डोमेन नाम की ownership को बनाए रखने के लिए सालाना अपने डोमेन नाम के लिए भुगतान करना पड़ता है। 

तोआपने क्या सीखा?

कुल मिलाकर, वेब होस्टिंग वह सेवा है जिसकी आपको आवश्यकता तब होती है जब आप एक वेबसाइट प्रकाशित करना चाहते हैं और एक ऑनलाइन उपस्थिति का निर्माण करना चाहते हैं। वास्तव में, एक वेबसाइट होने से आप दुनिया भर के लाखों उपयोगकर्ताओं तक आसानी से पहुँच और जुड़ सकते हैं 


एक अच्छा वेब होस्ट आपको इंटरनेट पर अपनी सामग्री को स्टोर और नियंत्रित करने का अधिकार देता है, आपके customers को एक उत्कृष्ट user experience का अनुभव प्रदान कराता है और आपकी वेबसाइट पर अधिक से अधिक उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करता है। 



अब, आप वेब होस्टिंग क्या है? What is Web Hosting in Hindi?के बारे में सब कुछ जान चुके हैं और एक नई वेबसाइट बनाने के लिए तैयार हैं!